तेरी सलामी मे वो बर्फ भी आज पिघल गई होगी

‪#‎वीर_हनुमंथप्पा_अमर_रहे‬

तेरी सलामी मे वो बर्फ भी आज पिघल गई होगी !
जिसकी लाख कोशिशों के बाद भी तूने हथियार नही डाले !!

तेरी सलामी मे वो बर्फ भी आज पिघल गई होगी ! जिसकी लाख कोशिशों के बाद भी तूने हथियार नही डाले !!
तेरी सलामी मे वो बर्फ भी आज पिघल गई होगी !
जिसकी लाख कोशिशों के बाद भी तूने हथियार नही डाले !!

तेरी सलामी मे वो बर्फ भी आज पिघल गई होगी !
जिसकी लाख कोशिशों के बाद भी तूने हथियार नही डाले !!

जहा हम और तुम हिन्दू –
मुसलमान के फर्क मे मर जाते है
वहा कुछ लोग हम दोनो की खातिर, बर्फ मे मर जाते है
– ऐसी भारतीय सेना को कोटि कोटि सलाम

No one can compensate this sacrifice of indian Legend .

जिन्होने -हमारी सुरक्षा के लिये –ठंड मे भी –
बर्फ ओढ़कर -अपना कर्तव्य पूरा किया —
– नमन
– वंदन
– प्रणाम
– श्रद्धांजलि

जहाँ तू और मैं हिन्दू मुस्लमान के फर्क में मर जाते हैं
वहाँ कुछ लोग हम दोनों की खातिर ‘बर्फ’ में मर जाते हैं!
‪- वीर_हनुमंथप्पा_अमर_रहे‬

इतिहास बन के रह गए कई युगपुरुष मगर।
तुम इतने बेमिसाल हो इतिहास रच दिया।।

एक ही मिट्टी में मिलता हैं आतंकी और सिपाही !
लेकिन हर कब्र को जनाजे, पे नाज नहीं होता !!

लौटता हूं तमगा वीरता का लेकर, कभी जान देश पर देता हूं,
कभी डरना नहीं मेरे देश के लोगो, मैं पहरा सरहद पर देता हूं,

ना हम भुले है ना यह ‘भारत’ आपके बलिदान से है यह ‘हमारा भारत’
ना हम भुले है ना यह ‘भारत’
आपके बलिदान से है यह ‘हमारा भारत’

तिरंगा है जान, तिरंगा है मान
तिरंगे खातिर ज़िंदा हैं, तिरंगे के लिए हो गये कुर्बान
जय हिन्द ! जय जवान !! शत् शत् नमन्

जो कर्ज है तुम्हारा, कैसे हम चुकाएंगे गर्व है तुमपे, शीश हम नवायेंगे ‪- #‎वीर_हनुमंथप्पा_अमर_रहे‬

आओ झुक कर सलाम करें उन्हें जिनके हिस्से ये मुकाम आता है !
किस कदर खुशनसीब है वे लोग खुन जिनका वतन के काम आता है !!

ना हम भुले है ना यह ‘भारत’
आपके बलिदान से है यह ‘हमारा भारत’
– #श्रद्धांजलि_अमर_जवानो

यह देश हमारा है वीर सपूत हनुमंथप्पा हमारा है !
हमारा इस देश का कण कण हमें प्यारा हमें प्यारा !!

एक सलाम नही एक पैगाम है वो, भारत माता की आन बान शान है वो !
कह दो सारे जयचंदों से, सीने में भरा हिंदुस्तान है वो !!

है कफ़न सर पे तना हुआ, दिल में देशप्रेम भर लेता हूं !
दुश्मन को अपनी चीख से, राख में ध्वस्त कर देता हूं !!

रजाई ओढ़ के सोच रहा हूँ ! उन्होने बर्फ़ कैसे ओढ़ी होगी ?
वीर अमर शहीद हनुमंथप्पा को सलाम.

जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर !
जान देने की रुत रोज़ आती नही….

मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना, ऐ भारत माँ !
मैं अपनी माँ की बाहों को, तरसता छोड़ के आया हू !!